राजस्थान उच्च न्यायालय ने अध्यापक भर्ती 2022 (लेवल-2) के मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सैकड़ों अभ्यर्थियों के चेहरे पर खुशी ला दी है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने भर्ती प्रक्रिया की विसंगतियों पर सख्त नाराजगी जताते हुए याचिकाकर्ताओं को नियुक्ति देने के आदेश जारी किए हैं।

क्या था पूरा मामला?

याचिकाकर्ता कौशल्या जाट और अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके अधिवक्ताओं (राम प्रताप सैनी, आनंद शर्मा और अरविंद कुमार शर्मा) ने अदालत के सामने दलील दी कि- भर्ती के संशोधित परिणाम जारी होने के बाद याचिकाकर्ताओं के अंक बढ़ गए थे, जिससे वे मैरिट में आ गए और नियुक्ति के लिए पूरी तरह पात्र हो गए। बता दें कि विडंबना यह थी कि याचिकाकर्ताओं से कम अंक प्राप्त करने वाले कई अभ्यर्थी फिलहाल स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि योग्य होते हुए भी याचिकाकर्ताओं को बाहर रखा गया था।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी और फटकार

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चयन बोर्ड और संबंधित अधिकारियों (रिस्पोंडेंट्स) को जमकर फटकार लगाई। न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों और उत्तर कुंजी में विसंगतियों पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने उन विशेषज्ञों के खिलाफ भी जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जिनकी वजह से परिणाम में त्रुटियां हुईं। वहीं अदालत ने 'नमो नारायण शर्मा' प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि समान परिस्थितियों में अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।

जीत की गूंज, बेरोजगारों के संघर्ष को मिला न्याय

इस कानूनी लड़ाई में बेरोजगार नेता देवेन्द्र शर्मा लंबे समय से अभ्यर्थियों के साथ न्याय की मांग उठा रहे थे। कोर्ट के इस फैसले के बाद उन तमाम अभ्यर्थियों के लिए नौकरी का रास्ता साफ हो गया है जो मैरिट में ऊपर होने के बावजूद तकनीकी खामियों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण सिस्टम से बाहर थे।

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